"कितना कुहरा है?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

शब्दों का दंगल कुहरा है कि छँटता ही नही!आज मेरे शहर का सबसे ठण्डा दिन है।खटीमा की सड़कों में दिल्ली जैसी भीड़-भाड़ रहती है। मोटर साइकिलों ने साधारण साइकिलों को तो मात दे दी है लेकिन आज तो मोटर साइकिलों के चक्के जमा हो गये हैं।आज दोपहर को 1 बजे केवल इक्का-दुक्का साइकिल... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

सर्दी

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[11 Jan 2010 19:48 PM]

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