वह दर्द तुम्हारा है

उदभावना तुम्हारे सिवा भी दर्द बहुत थेकुछ मिट गए,कुछ बीत गएकुछ रीत गएबाकी सब रह रहकर चुभते है पर एक वो जो न बीता न रीता और न ही भूलाऔर चुभाना तो दूर जिस कमबखत ने छुआ तक नहीं मुझेबस एक आदत सा साथ साथ चलता हैराग राग में बसा रहता है पर आज भी कुआर हैवह दर्द तुहारा है... [पूरी पोस्ट]
writer pankaj mishra

दर्द

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[02 Jan 2010 06:09 AM]

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