संस्थाएं नारायण-परायण बनें 2

मैत्री कुछ लोग हमारे सर्वोदय-समाज की योजना की रचना को `लूज ऑर्गनाइजेशन´ यानी शिथिल रचना कहते हैं। रचना को अगर हम शिथिल करें तो कोई काम नहीं बनेगा। इसलिए रचना शिथिल नहीं होनी चाहिए। पर यह शिथिल रचना न होते हुए `अ-रचना´ है यानी, केवल विचार के आधार पर हम खड़े रहना... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[11 Jan 2010 11:20 AM]

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