पृथ्वी की उर्वरा को निचोड़कर
आजकल सर्दी सब पर भारी है। बीच - बीच में घना कोहरा भी घिर आता है। आज तो पूरे दिन कोहरा बूँद - बूँद कर बरसता रहा। फिर भी सब कुछ अपनी चाल चल रहा है। अभी कुछ देर पहले ही कुछ लिखा है उसी का एक कवितानुमा हिस्सा साझा करते हैं सबके साथ :सुन्दर - असुन्दरजो सहा...
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sidheshwer
कविता
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[11 Jan 2010 11:32 AM]



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