बँटा हुआ सत्य
बहुत-बहुत पहले सोचा हुआ होता था सत्य फिर बोला हुआ हो जाता था सत्यअभी हाल तक लिखा हुआ तो निश्चित होता था सत्यअब समय ये है कि सोचा हुआ सत्य नहींकहा हुआ सत्य नहींलिखा हुआ भी सत्य नहींतो क्या है सत्य?मेधा के नए प्रवीण कहते हैं कि सत्य बँटा हुआ हैसब में सब...
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अभय तिवारी
कविता
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[10 Jan 2010 23:39 PM]



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