हर पल साथ रहे तुम मेरे
ओस में डूब कर फूल की पंखुड़ी भोर की इक किरण को लगी चूमनेगंध फिर तितलियों सी हवा में उड़ी, द्वार कलियों के आकर लगी घूमनेबात इतनी हुई एक पत्ता कहीं आपके नाम का स्पर्श कर आ गयायों लगा आप चलने लगे हैं इधर, सारा उपवन खुशी से लगा झूमने ...
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राकेश खंडेलवाल
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[10 Jan 2010 21:20 PM]



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