क़त'आत : अहमद नदीम क़ासिमी
दो दिनों से घर पे हूँ .... दफ़्तर से निजात कभी कभी अच्छा लगता है !! एक पुरानी डायरी के कुछ सफ़हे पलट कर देख रहा था....मुख्तलिफ शायरों के कुछ क़त'आत मिले जो न जाने कब से दर्ज हैं यहाँ ........क़त'आत मुझे ख़ास तौर पे पसंद आते हैं. क़त'अ उर्दू या फ़ारसी नज़्म...
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अमिताभ मीत
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[10 Jan 2010 21:41 PM]



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