बात

आर्जव गर्म टहकार,कुनकुनी पीली ,चमकीली उत्फुल्ल,धूपसिर्फ धूप नहीं है । दरसल वह एक बात है ।बात –जो सूरज धरती से किया करता है ।रोज रोज , हर रोज ।उसके कई अर्थ हैं ।अनेक भाव ,गन्ध ,भंगिमाएं ,कहानियां हैं ।धरती की छाती पर टंकीछोटी से छोटी घास से लेकरवृहद देवदारू व... [पूरी पोस्ट]
writer Aarjav

सूरज

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[10 Jan 2010 15:45 PM]

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