जोर जुल्म के टक्कर में नजीर बनी जानकी
जिंदगी के कठोर अनुभवों में पककर जानकी वज्र हो गई है। जोर-जुल्म के खिलाफ वह प्रतिरोध की एक नजीर है। किसी निर्बल और असहाय के समर्थन में अपनी सेना लेकर खड़ी होती है तो दबंग भी उससे थर्रा उठते हैं। वर्ष 2005 में उसका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुआ।...
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Vivek Gupta
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[10 Jan 2010 13:25 PM]



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