याद

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... वो मंज़र कभी याद आते हैं , कभी आँखों से बरस जाते हैं.रह जाते हैं ठहर कर गालों पर,मुस्कान बन बिखर जाते हैं.दिन भर रहते हैं संग मेरे,रात में तारे बन जगमगा जाते हैं.चुभते हैं दिन भर दिल में मेरे,रात होते ही महेक जाते हैं.उठते हैं अंगार बनके ज़हन में,राख... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

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[10 Jan 2010 11:45 AM]

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