एक बढ़िया निर्देशक की कमज़ोर प्रस्तुति-'माहिम जंक्शन'
कमानी सभागार में उपस्थित लगभग सभी सहृदयों के दिमाग में यही बात घूम रही होगी कि क्यों आखिर वह माहिम जंक्शन देखने आया.मेरे पास दो वाजिब कारण था.पहला ये कि इस प्ले में मेरा जूनियर 'शिवम् प्रधान'काम कर रहा था और दूसरा यह कि मैं हिंदी सिनेमा के सत्तर के दशक...
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मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
१२वाँ भारंगम डायरी...
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[10 Jan 2010 11:47 AM]



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