Baaten
नई सुबह थी आज की . मेरे लिए तो एक से अधिक अर्थों में नई . पहली बात यह है कि आज लगातार दूसरा दिन है जब मैं अपने नियम पर चल पड़ा हूँ- लिख रहा हूँ. न लिखने का कोई बहाना नहीं तराशा.दूसरी बात यह कि सुबह खिड़की से बाहर झांका तो समझ में नहीं आया कि बाहर...
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[09 Dec 2009 19:05 PM]



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