Baaten

Baaten बातों का मज़ा तभी है जब बात से बात निकलती रहे. बतरस कर्णप्रिय हो और कान से उतर कर कहीं दिल को छू भी जाए.दिल को वही बात छूती है जिस में कहीं न कहीं "उस" का जिक्र हो. जैसे कि सूफियों का कलाम."वह" जिस किसी भी संत फ़कीर,  सूफी ,सांई, या गुरु की... [पूरी पोस्ट]
writer PS
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[11 Dec 2009 17:34 PM]

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