पीली हरी जमीं

भारतीय वास्तु शास्त्र पीली हरी जमीं पीली हरी जमीं जहाँ , जम-जम बरसे नोट। खट्टा इसका स्वाद है , करो सेठजी नोट।। करो सेठजी नोट, यह देय शहद सी गंध। वैश्या भूमि कहाय , चलाय धन्धे जो बंद।। कह `वाणी´ कविराज, धन देवे धरा पीली। स्वर्णाभूषण पहन, पित्नयाँ पीली-पीली।। शब्दार्थ : जम-जम... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com
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[10 Jan 2010 09:03 AM]

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