जैन:प्राचीन इतिहास-4
गतांक से आगे........ऋग्वेद की वातरशना मुनियों के संबंध की ऋचाओं में उन मुनियों की साधनायें ध्यान देने योग्य हैं। एक सूक्त की कुछ ऋचायें देखिये-मुनयो वातरशनाः पिशंगा वसते मला।वातस्यानु ध्राजिं यन्ति यद्देवासो अविक्षत ।।उन्मदिता मौनेयेन वाताँ आतस्थिमा...
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HEY PRABHU YEH TERA PATH
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[10 Jan 2010 01:16 AM]



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