लोकभारती द्वारा प्रकाशित - 'साबुन' कहानी अपने आप में बेजोड और बहुत ही दिलचस्प है।
कुछ कहानीयां अपने आप में बेजोड होती हैं। बहुत ही दिलचस्प। ऐसी ही एक कहानी है ‘साबुन’। यह उस दौर की कहानी है जब कि साबुन का इस्तेमाल करना एक तरह से लक्जरी ही माना जाता था, खास करके लोअर मिडिल क्लास के लिये जो...
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सतीश पंचम
पुस्तक समीक्षा
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[09 Jan 2010 23:39 PM]



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