Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi
इस ग़ज़ल के साथ हाज़िर ए ख़िदमत हूँ अगर आप लोगों को पसंद आई तो समझूँगी मेरी मेहनत कामयाब हो गयी ग़ज़ल__________________सुकूँ की ,प्यार की,दोनों जहाँ की बात करें क़वी इरादों की पीरो जवाँ की बात करें उलट दें आज बिसातें सभी सियासत...
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इस्मत ज़ैदी
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[09 Jan 2010 22:45 PM]



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