तुमने कुछ कहा होता - दूसरा और अंतिम भाग

कच्‍चा चिट्ठा एक दिन बड़े आत्मविश्वास के साथ मुस्कराते हुए सुमति मेरे पास आई और अपनी शादी का कार्ड दे कर चली गई। मैं आसमान से ऐसा गिरा कि किसी खजूर पर भी नहीं अटका। चारों खाने चित। और तब मुझे पता चला कि सुमति को खो कर मैं क्या खो रहा हूँ। चार दिन तक तो मेरे दिमाग में... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी

कहानी

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[09 Jan 2010 22:30 PM]

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