सुख रामों-शिबू सोरेनों वाली पार्टी विद डिफरेंस
अपन ने मनमोहन सिंह का भाषण पढ़ा। देवकांत बरुआ की याद आ गई। इमरजेंसी के दिन थे। चापलूसों का जमाना था। खुद्दार जेल में थे, चापलूस बाहर। इंदिरा गांधी ने बरुआ को कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। तो उनने चापलूसी की सारी हदें पार कर दी थी। जब कहा- ‘इंदिरा इज...
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Ajay Setia
india gate se sanjay uvach
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[29 Dec 2009 03:22 AM]



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