कुण्डलिनी: --आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्य नर्मदा

संजीव  सलिल  की  रचनाएँ कुण्डलिनीआचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्य नर्मदाकरुणा संवेदन बिना, नहीं काव्य में तंत..करुणा रस जिस ह्रदय में वह हो जाता संत.वह हो जाता संत, न कोई पीर परायी.आँसू सबके पोंछ, लगे सार्थकता पाई.कंकर में शंकर दिखते, होता मन-मंथन. 'सलिल' व्यर्थ है गीत, बिना... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

samyik hindi kavita

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[09 Jan 2010 12:05 PM]

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