आंसू

KALAM KA KARAZ आँख से टपका हुआ , इक़ बे रंग कतरा , तेरे दामन की पनाह पाता, तो आंसू होता ! बात बात पे जो बहता रहा , वो पानी था ,बिना ही बात जो आता , तो आंसू होता !वस्ल में जागती आँखें ,पथरा गयी होतीं ,पलक झपकते ही आता ,तो आंसू होता !नींदों में ख़लल होता , जो मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev kuralia

आंसू

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[09 Jan 2010 12:21 PM]

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