सबका सफर अलग है लेकिन अलग अलग रफ़्तार है - आत्म प्रकाश शुक्ला ( प्रसिद्द गीतकार )

HPSHARMA सबका सफ़र एक है लेकिन अलग अलग रफ़्तार है,और एक दिन थककर सबको सोना पाँव पसार है।ऐसा कौन नहीं जो जूझे मौजो से मझधार से, तैराको की असल कसौटी परखी जाती धार से। दुनिया अर्ध्य चढाती उनपर जिनका बेडा पार है,और एक दिन थककर सबको सोना पाँव पसार है।सबकी अपनी तीर... [पूरी पोस्ट]
writer HARI SHARMA
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[09 Jan 2010 10:29 AM]

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