उस आयोजित कार्यक्रम के बाहर खड़े थे कुछ प्रायोजित बच्चे

वो चुप न रह सका "नक्सलियों नें मेरी आखों के आगे बेरहमी से मेरे मां-बाप को मार दिया, वो याद करके आज भी मैं थर्रा जाता हूं" - राजेन्द्र कुमार (अब अनाथ आदीवासी बच्चा), दन्तेवाड "मैं भी बड़ा होकर पुलिस बनूंगा, जिन नक्सलियों ने मेरे पापा को मारा, मैं उन्हें मार दूंगा" -... [पूरी पोस्ट]
writer विश्व

देशद्रोह

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[09 Jan 2010 09:09 AM]

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