कागज के पुराने टुकड़ो से - औरो को सताने वाले खुद चैन नहीं पाते हैं...
आज पुराने चंद कागज मिले उसमे मेरी खुद की लिखी रचना मिली . यह रचना मेरे द्वारा उस समय लिखी गई थी जब पंजाब और कश्मीर में आतंकवाद चरम सीमा पर था. आपकी सेवा में आज प्रस्तुत कर रहा हूँ.औरो को सताने वाले खुद चैन नहीं पाते हैं औरो को जलाने वाले भी खुद जला करते...
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महेन्द्र मिश्र
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[09 Jan 2010 05:12 AM]



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