बस यूँ ही टेंस हो जाया करती हूँ

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का आदाब! खुशामदीद! खैरमकदम! आप सभी का ........उत्तर भारत में इस कड़ाके की सर्दी में अगर गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया तो क्या किया । ब्लोवेर में हाथ गर्म कर, दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ कर और साथ में फूं -फूं कर हाथ इस लायक तो हो चुके है कि keyboard पर... [पूरी पोस्ट]
writer Priya

कुछ बस यूँ ही

views
27
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
12
[09 Jan 2010 04:36 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix