हमारे बीच केवल मेरा प्रेम उभयनिष्ठ है!
*थोडी देर वोदस्तक देती रहीबंद बदन परफिर इन्तेज़ार किया थोडाखुलने काफिर दी दस्तकफिर इन्तेज़ार कियाऔर आखिरकार बैठ गयीबदन के चौखटे पेबदन, अक्सर रूहों की नहीं सुनते!**स्वप्नों कीसारी नमी सोख लीवक़्त नेसूखे सपने रगड़ खा करएक दिन जला गएसारी नींद.***घडी भर की...
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ओम आर्य
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[09 Jan 2010 02:09 AM]



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