चाणक्य नीति दर्शन-कुसंस्कारी में सुधार की अपेक्षा व्यर्थ (sanskar aur satsang-hindi sandesh)

दीपक भारतदीप की हिंदी एक्सप्रेस पत्रिका अंतर्गतमलो दृष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि।न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च यत्।।हिंदी में भावार्थ-जिसके मन में मैल भरा है ऐसा दुष्ट व्यक्ति चाहे कितनी बार भी तीर्थ पर जाकर स्नान कर लें पर पवित्र नहीं हो पाता जैस मदिरा का पात्र आग में तपाये जाने पर भी पवित्र... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

संस्कार

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[09 Jan 2010 01:12 AM]

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