पाप !!!

कविताओं के मन से दोस्तों ,मैंने ये कविता 1987 में लिखी थी. ये मेरे एक मित्र की आत्मकथा पर लिखी थी ,इसे लिखने में मुझे बहुत मानसिक उलझन भी थी .. क्योंकि इस कविता की पूरी undertone सिर्फ physical relation पर ही based है ...मैंने अब उस मित्र से permission ली है की इसे मैं... [पूरी पोस्ट]
writer Vijay Kumar Sappatti
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[09 Jan 2010 00:59 AM]

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