दोबारा कैसे जियूँ
तारीखकैसे याद रखूँहर तारीखइक कहानी हैकभी गम हैकभी ख़ुशी हैतारीख की बेड़ियों सेयादों का अंकुरजो फूटाकभी तारीख मेंकराहता इंतज़ार मिलातो कभी इम्तिहानकभी दर्द कासैलाब मिलातो कभीभावनाओं का तूफ़ानकहीं खुशियों कीसौगात मिलीतो कहीं जुगनू सेचमकते पलों का हिसाबमगर फिर...
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वन्दना
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[09 Jan 2010 00:51 AM]



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