श्रम की पूंजी से लिखेंगे खुशहाली की नयी इबारत

dikhsa दीक्षा Anand rai कभी कभी हम सपने देखते हैं. सभी सपने सच नहीं होते. मेरी यह रपट भी एक सपना है. दुआ करिए कि यह सच हो जाए. दुआ करिए कि खाली हाथों को काम मिले और पूर्वांचल की विशाल जनसेना खेतों से खुशहाली लाये. हमने यही सपना देखा है कि गोरखपुर और बस्ती मंडल में... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द राय
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[08 Jan 2010 22:31 PM]

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