Veer Bahuti

Veer Bahuti गज़ल इस गज़ल को भीादरणीय प्राण भाई साहिब ने संवारा है। उनकी अति धन्यवादी हूँ।गज़ल हमारे नसीबां अगर साथ होतेबुरे वक़्त के यूँ न आघात होते.गया वक़्त भी अपना होता सुहानासुहाने हमारे भी दिन रात  होतेजलाते न हम आशियाँ अपने हाथोंसफ़र जिंदगानी के सौगात... [पूरी पोस्ट]
writer निर्मला कपिला

ग़ज़ल

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[08 Jan 2010 22:36 PM]

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