एक दीवाना एक दीवानी
एक पल को भूल जा की तेरी भी कोई हस्ती है,उसके इश्क में डूबी ज़िन्दगी भी एक मस्ती है, छलक जाने दे खुदको उस हुस्न के प्याले से, मचल जाने दे दीवानी रात को मदमस्त उजालों पे. यह वादा है की हुस्न भी नज़रें बिचेगा एक दिन,होगी बावरी हर दीवानी तेरे इश्क पे उस...
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पियूष अग्रवाल
कविता
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[08 Jan 2010 15:57 PM]



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