अणु-अणु सँवर-सँवर तिल-तिल मिट-मिट पूरा करार करतीं हूँ
उमर-खैयाम की रूबाइयों के अनुवादक पंडित केशव पाठक के बारे में जितना लिखा जाए अंतर जाल के लिए कम ही है मुझे विस्तार से जानकारी न होने के कारण जो भी लिख रहा हूँ श्रुति के आधार पर फिर भी कुछ जानकारीयां उपलब्ध किताब में मिलते ही लोभ संवरण न कर सका जाने...
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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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[08 Jan 2010 14:06 PM]



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