ब्लागर सम्मेलनों की ऐसी की तैसी
हद हो गई ब्लागर सम्मेलनों की ...कोई यहाँ से बुला रहा है तो कोई वहाँ से पुकार रहा है... इनकी ऐसी की तैसी .... मैं अकेली जान ...किसका घर आबाद करूँ और किसका बंटाधार करूँ? . और फिर सारे यही कहते हैं की आ जाओ हमारी नगरी..हमारे द्वारे.. पण भैया ई तो पहले...
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राजीव तनेजा
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[08 Jan 2010 13:45 PM]



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