मेरा प्रेम

अमिताभ उसे न कभी देखा,न मिला औरन ही जाना। हां,अपने आसपासउसके होने का अहसासहमेशा रहता है।हवा संग वोकभी शरीर से लिपटती हैतो कभी खुशबू बननथुनों से होकरसीधे हृदय तकजा उतरती है। रोमांचित मनमस्तिष्क में बैठउसकी आकृतियां उकेरने लगता है।और जब इन आकृतियों कोकैनवास पर... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव

पूजा

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[08 Jan 2010 13:05 PM]

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