कवि सम्मेलन की महफ़िल में शोभा बढ़ा रही है आज सात समन्दर पार से सुधा ओम ढींगरा की कविता - - मना ले
मना ले घरौंदे से, बाहर सिर निकाल,कोई तो आवाज़ देकर उन्हें बुला लें.तैयार हैं, गगन से गिरने को जो,कोई सीप मुँह खोल उन्हें अपने में समा लें.समुद्र में,रह कर भी प्यासे रहे,कुछ अश्रु ही टपकें तो प्यास बुझा लें.स्मृतियों की दीवारों पर, इच्छाओं की छत्त डाल,चलो...
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[08 Jan 2010 12:45 PM]



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