बन-मक्खन
कल रात नींद नहीं आईमन कियाबाजू वाले की रजाई खींच लूँ ,बंद आँखों के साथ उसकोबिठा लूँ पीछेबाईक पर!खूँटी पर टंगी, बिस्तर पर पड़ीअपनी या किसी कीपैंट कमीज की जेबें तलाशूँऔरनिकालूं कुछ १०-२० के नोटभर लूँ कमरे के सारे चिल्लरजेब में अपनी !फिर निकल पडूंसर्दी की...
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निपुण पाण्डेय
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[08 Jan 2010 11:50 AM]



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