bhawnayen

bhawnayen वो जो थे मेरी मुट्ठी में बंद चन्द रेखाए ,उनको भी चुराकर ले गया कोई । लिखी थी जो दास्तान दिल की एक कोरे कागज़ पर ,रात के अँधेरे में उन्हें मिटा गया कोई ।रखे थे निगाहों में छुपाकर कुछ आंसू अपने जिगर के ,चुपके से आकर मुझको रुला गया कोई । ।... [पूरी पोस्ट]
writer deep
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[08 Jan 2010 03:32 AM]

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