मांदर की थाप और कुहू-कुहू
मांदर की थाप गांव के दूसरे छोर में गुंज रही थी। शैला नृत्य कर रहे लोगों ने मुझे देखा तो वे और भी मस्त होकर नाचने लगे, मांदर की थाप की आवाज बढ गई। वे मुझे भी नाचने के लिए कहने लगे। उनका जोश और उत्साह देख खुद को नहीं रोक पाया। गलियों में उनके साथ आधा घण्टे...
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EDHAR HAI
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[08 Jan 2010 05:32 AM]



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