ज़मीनों की मारामारी
भक्तों, इस घोर कलिकाल में द्वापर घुसने को आतुर है। अपनेराम भयभीत हैं कि अब क्या होगा। गंगातट पर कुम्भ का मेला लगने वाला है। साधुसंतों की रेलमपेल शुरू हो चुकी है। एक तरफ पाण्डव साधुवेश में पाण्डव हैं और दूसरी ओर अफ़सरों की कौरवी सेना। मामला वही भूमि...
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डॉ. कमलकांत बुधकर
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[08 Jan 2010 07:44 AM]



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