हां वो तुम हो....

कलमबंद कल रात बादलों की आड़ मेंजो खेल चल रहा था,उसकी रचनाकार तुम होहां वो तुम हो,बड़े इंतज़ार के बाद,बेक़रार दिल पर,चांदनी बरसाने वाली तुम होहां वो तुम हो,पास तो न हो तुम इस वक्त मेरे,पर रात के अंधेरे मेंमुझ पर छुपी नज़रों से देखतीहां वो तुम हो,ग़र होती पास... [पूरी पोस्ट]
writer शशांक शुक्ला

कविता

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[08 Jan 2010 07:48 AM]

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