दो दिन सात सत्र ३२ घंटे, डूबा रहा मैं कवि संगम में. (एक Report)

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh वन्दे मातरम् का नारा है तिरंगा हमको प्यारा है जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमे रसधार नहीं वो ह्रदय नहीं है पत्थर है जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं और...... जो वक़्त की आंधी से खबरदार नहीं है वो कुछ और ही है वो कलमकार नहीं है राष्ट्र जारण धर्म हमारा... जी... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ 'सतरंगी'

rashtrya kavi sangam

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[08 Jan 2010 04:58 AM]

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