सर्दी ने मार डाला...

अर्ज़ है... कोहरे में कुछ सुझाई नहीं दे रहा था.... हाथ को हाथ नज़र नहीं आ रहा था... लेकिन फिर भी घर तो पहुंचना ही था.. रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे... मोटरसाइकिल पर चलना दूभर हो चुका था... सड़क पर हर तरफ़ बस कोहरा ही कोहरा था... आगे वाली कार के पीछे मैं चलता चला... [पूरी पोस्ट]
writer अबयज़ ख़ान
views
24
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
8
[08 Jan 2010 02:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix