केवल कुछ परम् मित्रों के लिए
यादो का एक कंकर जो मन की झील में फेंका,ठहरे पानी सा रुका दिल मेरा भी मचल उठा है,उठ के देखा मैने खुद को जब आईने में अपने,अपने अक्स मे चेहरा मुझे इक ओर दिखा है,चेहरा था वो मुझसा मगर मुस्कान थी तेरी,आँखों मे मेरी ख्वाब, ऐ दोस्त, तेरा ही दिखा है,मिलते हैं कई...
[पूरी पोस्ट]
Gurnam Singh Sodhi
15
1
0
1
1
[08 Jan 2010 00:29 AM]



Shuffle








