"यूँही बस

"यूँही बस "तुम मुझ से बोलती रहीं ...चुप चाप यूँही बस,जख्मो पे हाथ फेरती चुपचाप यूँ ही बसक्यों लग रहा है दिल को तुम हो आसपास ही ,आ जाओ मेरे सामने ... चुप चाप यूँ ही बस.कुछ तो ज़रूर है जो हमे हो रहा है यूं,तुम ही ज़रा बताओ ना ... चुप चाप यूँ ही बस.तुमको भी... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[01 Jan 2010 22:34 PM]

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