मालवा का महाकाल

एकोऽहम् याद नहीं आता कि निगम साहब से इस बार का मिलना कितने बरसों बाद हुआ। लेकिन मिलने पर पाया कि वे वैसे के वैसे ही हैं जैसे कि कुछ बरस पहले मिले थे। लगा, उन्होंने काल को अपनी मुट्ठी में बन्द कर नियन्त्रित कर लिया हो।मैं बात कर रहा हूँ उज्जैन निवासी डॉ। श्याम... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

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[06 Jan 2010 22:32 PM]

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