आदरणीय राकेश खंडेलवाल जी और आदरणीय प्राण साहब की जुगलबंदी कैसी रहेगी आज के अंक के लिये

सुबीर संवाद सेवा म प्र बहरे मुतकारिब, नये सीखने वालों को उस्‍ताद अक्‍सर एक ही बात कहते हैं जाओ मुहब्‍बत की झूठी कहानी पे रोये इस गीत को सुनो और इस की धुन पर कोई ग़ज़ल लिख कर लाओ । दरअसल में ये गीत नये सीखने वालों के लिये कखग सीखने जैसा है । इसमें रुक्‍न बहुत सीधे सीधे टूटे हुए... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[07 Jan 2010 22:13 PM]

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