वर्ष का आरम्भ

उधेड़-बुन पहले प्रतीक्षा रहती थी वर्ष के आरम्भ कीक्यूंकि तब डायरी बदली जाती थीपहले प्रतीक्षा रहती थी वर्षा के आरम्भ कीजो सावन की बदली लाती थीअब कम्प्यूटर के ज़माने में डायरी एक बोझ हैऔर बेमौसम बरसात होती रोज हैबदली नहीं बदलीज़िंदगी है बदलीबारिश की बूंदे जो कभी थी... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

greetings

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[07 Jan 2010 14:25 PM]

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