आधी रात का चाँद और मैं---मेरी पचासवीं कविता
नवंबर माह के यूनिकविता प्रतियोगिता में हिन्दयुग्म द्वारा सम्मानित मेरी एक कविता..रात के आगोश में, सितारों को छेड़ता,चाँद, और ज़मीं पर मैं, अपने मानवीय अस्तित्व का वहन करता हुआ, दोनों उलझ पड़े,बातों की गहमा-गहमी में, बादलों की परतों से, आँखमिचौली खेलता...
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विनोद कुमार पांडेय
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[07 Jan 2010 11:48 AM]



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