दोस्ती
किताब सी तुम्हारी दोस्ती.पढ़कर इम्तहान देनान लिखकर ईनाम लेनाबस आदमी होते जानाज़मी-आसमां से भर जाना.ज़िल्द बदलने की चिंता न पन्ने उखड़ने का डरबस बरतना प्यार सेसंवरते जाना.काली स्याही मेंउजली भाषा सीसाथी किताब सीतुम्हारी दोस्ती....
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शशिभूषण
मेरी कविताई
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[07 Jan 2010 11:18 AM]



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